अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग़ज़ा के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नाम का संगठन बनाया है. यह बोर्ड ग़ज़ा में व्यापक शांति पहल के तहत शासन, पुनर्निर्माण और निवेश की निगरानी के लिए बनाया गया है.
भारत, पाकिस्तान, जॉर्डन, हंगरी, तुर्की, मिस्र और अर्जेंटीना समेत कई देशों के नेताओं को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेज दिया गया है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने पुष्टि कर दी है कि पाकिस्तान ग़ज़ा के पुनर्निर्माण और स्थाई युद्ध विराम के लिए ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ में शामिल होगा. वहीं तुर्की ने बताया है कि वो इसमें शामिल होने के लिए गुरुवार को स्विट्ज़रलैंड में समझौते पर हस्ताक्षर करेगा.
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर लिखा, “मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ग़ज़ा में स्थायी शांति लाने वाले शांति बोर्ड में भाग लेने का निमंत्रण दिया है. यह बोर्ड स्थिरता और समृद्धि प्राप्त करने के लिए प्रभावी शासन का समर्थन करेगा.”
भारत को भले ही अमेरिका ने ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ से जुड़ने का न्योता दिया हो, लेकिन यह भारत के लिए असमंजस की स्थिति है. भारत ने अभी तक अमेरिका के न्योते को स्वीकार या अस्वीकार नहीं किया है.
विश्लेषकों का मानना है कि भारत का किसी फ़ैसले पर पहुंचना इतना आसान नहीं है.
‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ में क्या दिक़्क़तें हैं?

टाइम्स ऑफ इसराइल के मुताबिक़, “बोर्ड ऑफ पीस के ड्राफ्ट चार्टर में ग़ज़ा का नाम तक नहीं है. इसमें लिखा है कि उन पुरानी संस्थाओं और तरीक़ों से हटकर चलने की हिम्मत दिखानी होगी, जो पहले नाकाम हुए हैं. चार्टर में एक तेज़ और असरदार अंतरराष्ट्रीय शांति संस्था की ज़रूरत बताई गई है.”









