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Kidney Racket – इन गवाहियों से हो सकते हैं आरोपी डॉक्टरों पर दोष सिद्ध

April 4, 2026 4:37 PM
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पढ़ें : क्यों रोकी जा रही हैं Kidney Racket केस में गवाहियां, क्या DRME पर भी है कोई दबाव

Kidney Racket – जालंधर। 2015 के हाई प्रोफाइल Kidney Racket की कड़ियाँ जैसे -जैसे दोबारा खुल रही हैं, वैसे वैसे इसमें शामिल और इसके दोषियों को बचाने वालों के हाथ पैर सूज रहे हैं। मालूम हो इस केस के मुख्य आरोपी सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टर राजेश अग्रवाल, डॉ संजय मित्तल और कई अन्य डॉक्टर/ प्रबंधक हैं जिन पर कई धाराओं के तहत केस चल रहे हैं।

Kidney Racket केस में अपडेट यह है कि एक तरफ विटनेस विंडो खोलने के लिए पब्लिक प्रॉसिक्यूशन ने सेशन कोर्ट में अपील दायर कर रखी है। इस पर फैसला आना बाकी है। दूसरी तरफ State vs Junaid अवैध किडनी ट्रांसप्लांट केस में सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को है। माननीय जज ने पिछली सुनवाई पर 27 मार्च को कहा था कि इस एप्लीकेशन पर वो कोर्ट के आर्डर का इंतज़ार कर रहे हैं। केस में गवाहों ने निजी रूप से अदालत में पेश न होने की छूट ले रखी है तो उन्हें इस सम्बन्धी नोटिस भेजा गया है।

Kidney Racket – बेल न होने की बात …

इन दिनों पंजाब सहित देश भर में चर्चा है कि आरोपी डॉक्टर राजेश अग्रवाल के पास बेल न होने की बात दबी आवाज में सब कह रहे हैं पर खुल कर कोई नहीं बोल रहा। 

दूसरा सवाल उठ रहा कि पंजाब सरकार के खुद के डिपार्टमेंट DRME (Directorate of Research and Medical Education, Punjab) ने बिना मंजूरी किडनी बदलने पर जब नेशनल किडनी अस्पताल का लाइसेंस रद्द किया तो आरोपी डॉक्टरों को DRME ने ही दोबारा लाइसेंस कैसे दिया।


Kidney Racket – Part of important statement by Saudagar Chand (DRME Superintendent)

इसी कड़ी में जो अब एक बहुत गंभीर नुक्ता सामने आ रहा है वो है कि जब इस केस से जुड़े अहम गवाह गवाही देना चाहते हैं तो उन्हें रोका क्यों जा रहा है। क्यों खुद सरकारी वकील को कोर्ट में बार बार अर्जी लगानी पड़ रही है कि गवाहों को सच बोलने की अनुमति दी जाये। आखिर ‘Witness Window जल्दबाजी में बंद क्यों की गई और किसके कहने पर हुई। ऐसे ही अनगिनत सवाल हैं जो इस पूरे न्यायिक सिस्टम को शक के घेरे में ला रहे हैं।

मालूम हो Kidney Racket केस की विटनेस विंडो को मीनाक्षी गुप्ता चीफ जुडिशियल मेजिस्ट्रेट NRI COURT की तरफ से बंद कर दिया गया था। बाद में उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए इस केस से खुद को अलग कर लिया था। क़ानूनी एक्सपर्ट का मानना है कि अगर सभी गवाहियां समय पर हो जातीं तो लोगों को इंसाफ मिल जाता, करप्ट लोग जेल में होते और लोगों का न्याय में भरोसा बढ़ता।  

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