नई दिल्ली। DIGITAL ARREST : CBI ने दिल्ली के रोहिणी के रहने वाले 73 साल के एक रिटायर्ड इंजीनियर की “डिजिटल गिरफ्तारी” के मामले में केस दर्ज किया है। आरोप है कि साइबर अपराधियों ने पुलिस और एक मल्टीनेशनल कूरियर कंपनी के कर्मचारियों का रूप धरकर उनसे ₹10 करोड़ ठग लिए।
उन्होंने दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल करके चीन के लिए बुक की गई एक खेप (कंसाइनमेंट) वापस आ गई है। इसके बाद, उन्होंने उन्हें अपने साथियों से मिलवाया, जिन्होंने मुंबई पुलिस के अधिकारियों का रूप धरा हुआ था। उन्होंने पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के प्रमुख के नाम पर कई ट्रांज़ैक्शन के ज़रिए उनसे पैसे ऐंठ लिए।
पीड़ित, जो रोहिणी के सेक्टर 10 में अपनी पत्नी के साथ रहते थे, ने पिछले साल अक्टूबर में जालसाज़ों को ₹10.3 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। उनकी शिकायत के आधार पर, दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एक FIR दर्ज की, जिसके बाद इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) विंग ने आगे की जांच शुरू की।
इस महीने की शुरुआत में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले को विस्तृत जांच के लिए CBI को सौंप दिया। यह कदम तब उठाया गया जब सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में “डिजिटल गिरफ्तारी” घोटालों के लगातार बढ़ते मामलों का स्वतः संज्ञान (suo motu cognisance) लिया।
इस महीने की शुरुआत में, CBI ने सिलीगुड़ी स्थित एक ट्रस्ट और उसके मैनेजर के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। उन पर आरोप है कि उन्होंने देश के सबसे बड़े “डिजिटल गिरफ्तारी” मामलों में से एक में दिल्ली के 78 साल के एक रिटायर्ड बैंकर से ₹23 करोड़ की ठगी की थी।
DIGITAL ARREST: CBI और ED अधिकारी बन ठगते थे
एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि पीड़ित, नरेश मल्होत्रा, को पिछले साल “डिजिटल गिरफ्तारी” के तहत एक महीने से ज़्यादा समय तक उनके घर में ही बंद रखा गया था।
उन्हें सिर्फ़ बैंक जाकर पैसे निकालने और उन जालसाज़ों को देने के लिए बाहर जाने दिया जाता था, जो CBI और ED अधिकारियों का रूप धरकर उनसे पैसे लेते थे।






