पंचकूला। KOTAK MAHINDRA BANK के पूर्व डिप्टी वाइस-प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र सिंह को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंचकूला नगर निगम (MC) से जुड़े कथित 145 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार कर लिया। ED ने सिंह को इस गबन का “मास्टरमाइंड” बताया है। गिरफ्तारी एक दिन पहले की गई है।
सिंह को ED की चंडीगढ़ ज़ोनल यूनिट ने प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी पंचकूला MC के खातों से सरकारी फंड की बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जांच के बाद की गई।
पंचकूला की एक विशेष PMLA अदालत ने सिंह को 9 जून तक नौ दिनों के लिए ED की हिरासत में भेज दिया।
मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच पंचकूला के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज एक FIR से शुरू हुई। यह FIR भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कोटक महिंद्रा बैंक के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई थी। FIR में आरोप लगाया गया था कि नगर निगम के 145 करोड़ रुपये बैंक अधिकारियों और अन्य लोगों की मिलीभगत से रची गई एक सुनियोजित आपराधिक साजिश के तहत गबन कर लिए गए।
ED के सूत्रों के अनुसार, जांच में बैंक अधिकारियों, नगर निगम के कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के बीच एक गहरे गठजोड़ का खुलासा हुआ है। इन लोगों ने कथित तौर पर मिलकर सरकारी फंड को गलत तरीके से इस्तेमाल करने के लिए काम किया।
एजेंसी ने दावा किया कि कोटक महिंद्रा बैंक के तत्कालीन कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप कुमार राघव और तत्कालीन डिप्टी वाइस-प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र सिंह ने पंचकूला MC के पूर्व सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर विकास कौशिक के साथ मिलकर साजिश रची। उन्होंने जाली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके नगर निगम के नाम पर दो अनाधिकृत बैंक खाते खोले।
ED ने बताया कि निगम के असली बैंक खातों में जमा फंड को बाद में इन अनाधिकृत खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। यह ट्रांसफर फर्जी ‘फंड माइग्रेशन लेटर’ के ज़रिए किया गया, जिन्हें कथित तौर पर नगर निगम की ओर से जारी किया गया दिखाया गया था।
जांचकर्ताओं को आगे पता चला कि इस तरह गलत तरीके से इस्तेमाल किए गए फंड को कई फाइनेंसरों तक पहुंचाया गया, जिनमें रजत दह्रा, स्वाति तोमर, कपिल कुमार और विनोद कुमार शामिल हैं। ED ने दावा किया कि ये सभी लोग पुष्पेंद्र सिंह के निर्देशों और नियंत्रण में काम कर रहे थे।
केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, रजत दह्रा और स्वाति तोमर के बैंक खाते, जिनके ज़रिए कथित तौर पर गबन किए गए फंड का एक बड़ा हिस्सा इधर-उधर किया गया था, वे भी सिंह के ही नियंत्रण में थे। जांच में आगे यह भी पता चला कि MC पंचकूला के नकली खातों से फाइनेंसरों को ट्रांसफर किया गया पैसा बाद में वापस पुष्पेंद्र सिंह और उनकी पत्नी प्रीति ठाकुर को भेज दिया गया। आरोप है कि सिंह के निर्देशों पर इन पैसों को रियल एस्टेट फर्मों और अन्य निजी व्यक्तियों को भी भेजा गया।
ED ने बताया कि पैसे के लेन-देन का पता लगाने और इस कथित धोखाधड़ी के अन्य लाभार्थियों की पहचान करने के लिए आगे की जांच जारी है।









