Bengal के 63 विधायकों, 6 सांसदों पर रेप और अन्य केस
BJP UNDER SCANNE-चुनाव आयोग को सौंपे गए हलफनामों में, बंगाल के 63 विधायकों, चार लोकसभा सांसदों और दो राज्यसभा सांसदों ने अपने खिलाफ लंबित मामलों की जानकारी दी है, जिनमें बलात्कार से लेकर पीछा करने (स्टॉकिंग) तक के अपराध शामिल हैं। अब जो लोग कानून बनाने वाले हैं जब वो ही कानून भी तोड़ रहे हैं तो इंसाफ मिलने की बात भूल ही जानी चाहिए । खबरें बताती रहती हैं -अब संसद और जुडिशरी भी क्रप्शन से अछूती नहीं रही ।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ और ‘नेशनल इलेक्शन वॉच’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों वाले निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या सबसे अधिक है। इसके बाद आंध्र प्रदेश और ओडिशा का स्थान आता है।
बंगाल में, 63 विधायकों, चार लोकसभा सांसदों और दो राज्यसभा सांसदों ने चुनाव आयोग को नामांकन दाखिल करते समय दिए गए अपने हलफनामों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के लंबित मामलों की जानकारी दी है।
आंध्र प्रदेश और ओडिशा में महिलाओं के खिलाफ अपराध के लंबित मामलों वाले सांसदों और विधायकों की संख्या क्रमशः 22 और 17 है।
पूरे भारत में विभिन्न दलों के दो लोकसभा सांसदों और 12 विधायकों के खिलाफ बलात्कार के मामले लंबित हैं। इनमें से एक सांसद और दो विधायक बंगाल से हैं।
सभी राजनीतिक दलों में, भाजपा के दो मौजूदा विधायकों और दो मौजूदा सांसदों, कांग्रेस के चार विधायकों, तथा टीडीपी (TDP), डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस, बीजेडी (BJD), नेशनल पीपुल्स पार्टी, भारत आदिवासी पार्टी और एआईएसएफ (AISF) के एक-एक विधायक ने अपने खिलाफ बलात्कार के मामले लंबित होने की घोषणा की है।
772 मौजूदा सांसदों और 4,109 विधायकों के हलफनामों के विश्लेषण से पता चला है कि 168 विधायकों और 19 मौजूदा सांसदों ने अपने खिलाफ महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज होने की जानकारी दी है।
केंद्र, बंगाल और 16 अन्य राज्यों में सत्ताधारी भाजपा के पास महिलाओं के खिलाफ अपराध के आरोपी निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या सबसे अधिक है।
भाजपा के 95 विधायकों, 10 लोकसभा सांसदों और एक राज्यसभा सांसद पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के आरोप हैं।
कांग्रेस के 19 विधायकों और एक लोकसभा सांसद पर भी ऐसे ही आरोप हैं, जबकि भाजपा की सहयोगी टीडीपी (TDP) के 17 विधायकों और एक राज्यसभा सांसद पर भी इसी तरह के आरोप हैं।
महिलाओं के खिलाफ अपराध के आरोपी निर्वाचित प्रतिनिधियों की सूची में ममता बनर्जी की ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के एक राज्यसभा सांसद, एक निर्दलीय लोकसभा सांसद और पांच निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं।
‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ की रिपोर्ट
इन अपराधों में एसिड अटैक से लेकर बलात्कार, महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना, यौन उत्पीड़न, अपहरण, शादी के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से डराना-धमकाना और पीछा करना (स्टॉकिंग) जैसे कई अपराध शामिल हैं। फरवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिया था कि वे चुनाव लड़ने के लिए आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने के कारण बताएं।
ADR ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की लगातार अनदेखी कर रहे हैं।
रिपोर्ट के साथ संलग्न कई हलफनामों से पता चलता है कि इन मामलों में अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं। ADR ने राजनेताओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की एक तय समय-सीमा के भीतर जांच और सुनवाई पूरी करने की सिफारिश की है।





