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SANJAY GUPTA फिल्म DIRECTOR की गिरने से मौत

October 31, 2026 6:38 AM
SANJAY GUPTA फिल्म DIRECTOR की गिरने से मौत
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SANJAY GUPTA NO MORE : ‘कांटे’, ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ और ‘काबिल’ जैसी फिल्मों के निर्देशक संजय गुप्ता का 57 साल की उम्र में निधन हो गया है। ‘फिल्म इंफॉर्मेशन’ के अनुसार, उन्होंने 30 अक्टूबर 2026 को आखिरी सांस ली।

दोपहर करीब 2:30 बजे वे किचन में गिर गए, जिससे उनके सिर में चोट लग गई। उस समय घर पर उनकी पत्नी और दो बेटे भी मौजूद थे, लेकिन शुरुआत में किसी को पता नहीं चला कि क्या हुआ है। इस घटना के हालात अभी भी स्पष्ट नहीं हैं।

संजय गुप्ता के निधन के साथ ही उनके कई दशकों लंबे फिल्मी करियर का अंत हो गया है। वे खासकर अभिनेता संजय दत्त के साथ अपने काम के लिए जाने जाते थे। उन्होंने संजय दत्त के साथ ‘कांटे’ (2002), ‘मुसाफिर’ (2004), ‘जिंदा’ (2006) और ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ (2007) जैसी फिल्मों में काम किया था। वो संजय दत्त के करीबी दोस्तों में इस एक थे ।

‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ 1991 के लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स शूटआउट पर आधारित थी, जिसके निर्देशक, निर्माता और सह-लेखक खुद संजय गुप्ता थे। बाद में, उन्होंने ‘शूटआउट एट वडाला’ (2013) के साथ क्राइम जॉनर में वापसी की, जो असल जिंदगी की घटनाओं से प्रेरित एक और फिल्म थी।

क्राइम ड्रामा के अलावा, गुप्ता ने ‘जज्बा’ (2015) जिसमें ऐश्वर्या राय बच्चन थीं और ‘काबिल’ (2017) -जिसमें ऋतिक रोशन और यामी गौतम थे जैसी फिल्मों के जरिए अलग-अलग जॉनर में भी काम किया। उनके अन्य निर्देशन प्रोजेक्ट्स में एंथोलॉजी फिल्म ‘दस कहानियां’ (2007), ‘एसिड फैक्ट्री’ (2009) और ‘मुंबई सागा’ (2021) शामिल हैं, जिसमें जॉन अब्राहम और इमरान हाशमी ने काम किया था।

निर्माता के रूप में संजय गुप्ता का काम और शुरुआती करियर

संजय गुप्ता ने अपने बैनर ‘व्हाइट फेदर फिल्म्स’ के जरिए एक निर्माता के तौर पर भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 2001 में इस बैनर की शुरुआत की थी। इस प्रोडक्शन हाउस ने कई सालों तक कई प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट किया।

उनकी हालिया फिल्मों में ‘द मिरांडा ब्रदर्स’ (2024) शामिल है, जिसमें मीजान जाफरी और हर्षवर्धन राणे हैं, और ‘विस्फोट’ (2024) है, जिसमें रितेश देशमुख और फरदीन खान ने काम किया है। एक फिल्म निर्माता के रूप में अपनी पहचान बनाने से पहले, गुप्ता ने पोस्ट-प्रोडक्शन और साउंड डिज़ाइन के क्षेत्र में काम किया। उन्होंने ‘करमचंद’ (टेलीविज़न सीरीज़) और ‘जलवा’ (फ़िल्म) जैसे प्रोजेक्ट्स में निर्देशक पंकज पाराशर को असिस्ट भी किया।

अपने पूरे करियर के दौरान, गुप्ता ने फ़िल्म निर्माण की एक अलग शैली विकसित की, जिसमें अक्सर स्टाइलिश एक्शन सीक्वेंस, अपराध पर आधारित कहानियाँ और शहरी परिवेश देखने को मिलते थे। उनके काम ने उन्हें मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा में एक जाना-माना नाम बना दिया।

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