जज की सलाह -शादी से पहले के वादों पर पूरा भरोसा नहीं करना चाहिए
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शादी का झांसा देकर रेप के आरोपों वाले एक मामले में ज़मानत अर्जी पर विचार करते हुए शादी से पहले के रिश्तों के बारे में कुछ बातें कहीं। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच एक ऐसे आदमी की अर्जी पर सुनवाई कर रही थी, जिस पर एक महिला से शादी का वादा करके उसके साथ फिजिकल रिलेशन बनाने का आरोप है। प्रॉसिक्यूशन ने दावा किया कि आरोपी उस समय पहले से शादीशुदा था और बाद में उसने दूसरी शादी कर ली।
कार्रवाई के दौरान, जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि लोगों को शादी से पहले करीबी रिश्ते बनाने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि, उनके हिसाब से, एक आदमी और औरत तब तक अजनबी रहते हैं जब तक वे कानूनी तौर पर शादी नहीं कर लेते, चाहे वे कितने भी करीब क्यों न दिखें। जज ने सलाह दी कि शादी से पहले किए गए वादों पर पूरा भरोसा नहीं करना चाहिए।
कोर्ट को बताया गया कि दोनों 2022 में एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट के ज़रिए जुड़े थे। प्रॉसिक्यूशन के मुताबिक, आरोपी ने महिला को शादी का भरोसा दिलाया, जिसके बाद उन्होंने फिजिकल रिलेशन बनाए, जिसमें दुबई की ट्रिप भी शामिल थीं। यह भी आरोप लगाया गया कि महिला की सहमति के बिना करीबी वीडियो रिकॉर्ड किए गए और बाद में उन्हें सर्कुलेट करने की धमकी दी गई।
प्रॉसिक्यूशन ने कहा कि महिला को आखिरकार पता चला कि वह आदमी पहले से शादीशुदा था और उसने जनवरी 2024 में पंजाब में दूसरी महिला से शादी कर ली थी। जस्टिस नागरत्ना ने शादी से पहले विदेश यात्रा करने के फैसले पर सवाल उठाया। जब सरकारी वकील ने बताया कि दोनों शादी के इरादे से एक मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म पर मिले थे, तो बेंच ने कहा कि अगर महिला शादी को लेकर इतनी पक्की थी, तो उसे पहले ऐसी यात्रा नहीं करनी चाहिए थी।
कोर्ट ने कहा कि यह झगड़ा आपसी सहमति से बने रिश्ते से पैदा हुआ लगता है और ऐसे मामलों में पूरे क्रिमिनल ट्रायल की ज़रूरत नहीं हो सकती। बेंच ने पार्टियों को मीडिएशन के लिए भेजने का सुझाव दिया। मामले की आगे की सुनवाई बुधवार (18 फरवरी) को तय की गई है।







