अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन, उन्होंने दुनिया को साफ़-साफ़ संदेश दिया था. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ज़ोरदार तालियों के बीच घोषणा की, “हमारे रास्ते में कुछ भी रुकावट नहीं बनेगा.”
यह एलान उन्होंने पिछले साल 20 जनवरी के दिन, वॉशिंगटन की कड़ाके की ठंड में, अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत पर दिए भाषण में किया था.
लेकिन सवाल यह है क्या दुनिया ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया था?
उस भाषण में एक ऐसी बात भी थी, जो ज़्यादा चर्चा में नहीं आई. ट्रंप ने 19वीं सदी के सिद्धांत ‘मैनिफेस्ट डेस्टिनी’ का ज़िक्र किया. इस विचार के मुताबिक अमेरिका को ईश्वरीय आदेश मिला है कि वह पूरे महाद्वीप में अपने क्षेत्र का विस्तार करे और अपने आदर्श फैलाए.
उस वक्त उनकी नज़र पनामा नहर पर थी. ट्रंप ने ऐलान किया था, “हम इसे वापस ले रहे हैं.”
अब वही घोषणा, वही दृढ़ संकल्प, ग्रीनलैंड के बारे में है – “हमें यह चाहिए ही.”
यह नया मंत्र है. और ऐसे समय में एक झकझोर देने वाली चेतावनी है, जब हालात पहले ही बेहद ख़तरनाक दौर से गुज़र रहे हैं.









