हिंद महासागर में ईरान के एक युद्धपोत पर अमेरिका द्वारा किए गए हमले के बाद भारत की राजनीति में भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल इस मामले में केंद्र सरकार के रुख़ को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं ईरान ने भी इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
क्या हुआ था पूरा मामला?
4 मार्च को अमेरिका ने हिंद महासागर में ईरान के एक युद्धपोत पर टॉरपीडो से हमला किया, जिसके बाद वह समुद्र में डूब गया। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर उस युद्धपोत का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
हालांकि, इससे पहले श्रीलंका की सरकार ने बताया था कि उन्हें ईरानी युद्धपोत “डेना” की ओर से एक डिस्ट्रेस कॉल (आपातकालीन संदेश) मिला था, जिसमें मदद की मांग की गई थी।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हमला कर एक गंभीर अपराध किया है।
अराग़ची के अनुसार, “ईरान के तट से करीब 2000 मील दूर फ्रिगेट डेना पर बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया। यह जहाज़ भारतीय नौसेना का मेहमान था और इसमें लगभग 130 नाविक सवार थे।”
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जो मानक स्थापित किए हैं, उसकी उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
गौरतलब है कि यह युद्धपोत हाल ही में भारत की मेजबानी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में शामिल हुआ था।
मोदी सरकार पर विपक्ष के सवाल

इस घटना को लेकर भारत की विपक्षी पार्टियों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरानी नौसैनिक भारत के एक कार्यक्रम में भाग लेने आए थे और भारत के मेहमान थे। उनके अनुसार, जब वे वापस लौट रहे थे तब अमेरिकी पनडुब्बी ने उनके जहाज़ पर हमला कर दिया, लेकिन भारत सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत के निमंत्रण पर ईरान ने अपने युद्धपोत को ‘मिलन युद्धाभ्यास 2026’ में भेजा था। उन्होंने आरोप लगाया कि जहाज़ पर हुए हमले में 100 से अधिक नाविक मारे गए, लेकिन सरकार की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया।
आरजेडी की प्रवक्ता प्रियंका भारती ने भी सरकार से सवाल करते हुए कहा कि जब ईरानी जहाज़ भारत के आमंत्रण पर नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ था और राष्ट्रपति की मौजूदगी में कार्यक्रम का हिस्सा बना था, तो उसके बाद हुए हमले पर भारत की प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई।
श्रीलंका की नौसेना का बयान
इससे पहले श्रीलंका की नौसेना ने बताया था कि आईआरआईएस डेना हिंद महासागर में डूब गया है। जहाज़ पर सवार करीब 180 लोगों में से लगभग 140 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
इस मामले को लेकर मीडिया में आई कुछ खबरों को भारत सरकार ने भ्रामक बताया है।
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक टीम ने कहा कि एक अमेरिकी चैनल में पूर्व अमेरिकी अधिकारी कर्नल डगलस मैक्ग्रेगर द्वारा किया गया यह दावा गलत है कि अमेरिका ईरान पर हमले के लिए भारतीय नौसैनिक अड्डे का इस्तेमाल कर रहा है।
विशेषज्ञों ने भी उठाए सवाल
कुछ विशेषज्ञों और पूर्व राजनयिकों ने भी भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।
पूर्व राजनयिक के. सी. सिंह ने कहा कि “चुप्पी कूटनीति नहीं होती। भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार किनारे किया जा रहा है।”
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भी कहा कि अगर भारत ने ईरानी जहाज़ को ‘मिलन’ अभ्यास में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं किया होता, तो वह उस क्षेत्र में मौजूद नहीं होता।
उनके अनुसार, सैन्य अभ्यास के प्रोटोकॉल के तहत जहाज़ों को गोला-बारूद साथ रखने की अनुमति नहीं होती, इसलिए ईरानी युद्धपोत निहत्था था।
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी पनडुब्बी का हमला पहले से सोची-समझी कार्रवाई हो सकता है, क्योंकि अमेरिका को इस बात की जानकारी थी कि ईरानी जहाज़ इस अभ्यास में शामिल है।
सिब्बल ने कहा कि भले ही भारत इस हमले के लिए राजनीतिक या सैन्य रूप से जिम्मेदार न हो, लेकिन इस मामले में भारत की नैतिक और मानवीय जिम्मेदारी जरूर बनती है।










