Punjab News-कोर्ट ने कहा, बिना जुर्माना हलफनामा स्वीकार नहीं होगा
चंडीगढ़ .Punjab News-पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट पंजाब सरकार और उसके एडमिनिस्ट्रेशन के कामकाज से खुश नहीं है। हाई कोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। उन्हें 3 नवंबर की सुनवाई के लिए निजी रूप से पेश होने के लिए तलब किया गया है। यह कार्रवाई कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ता (DA) देने के हाई कोर्ट के आदेश का पालन न करने के कारण की गई है।
जस्टिस हर्ष बंगेर की बेंच ने कहा, “ऊपर बताई गई बातें और हालात साफ तौर पर दिखाते हैं कि प्रतिवादियों ने कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के मामले में अवज्ञाकारी रवैया अपनाया है, जिसे कानून के तहत बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।” वकीलों ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है, लेकिन उसमें कुछ कमियां (डिफेक्ट्स) हैं, और मुख्य सचिव ने भी अनुपालन रिपोर्ट (compliance report) दाखिल नहीं की है।
हाई कोर्ट कर्मचारियों और पेंशनभोगियों द्वारा 21 अगस्त को दायर की गई अवमानना याचिकाओं (contempt petitions) पर सुनवाई कर रहा था। राज्य सरकार हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के 3 अगस्त के फैसले का पालन करने में विफल रही थी। उस फैसले में, कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया था कि वह कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का सारा बकाया महंगाई भत्ता (DA) 15 दिनों के भीतर जारी करे। यह भुगतान केंद्र सरकार द्वारा ‘ऑल इंडिया सर्विसेज’ (IAS/IPS/IFS) अधिकारियों को दी जाने वाली दरों के बराबर होना चाहिए था।
कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि जब तक सारा बकाया नहीं चुका दिया जाता, तब तक वह किसी भी तरह के “अनुत्पादक खर्च” (unproductive expenditures) न करे जैसे कि प्रिंट या सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान चलाना। साथ ही, मुख्य सचिव को 31 अगस्त तक अनुपालन हलफनामा (compliance affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।
सरकार इस आदेश का पालन करने में विफल रही और मुख्य सचिव ने अभी तक कोई अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं की है। राज्य सरकार ने 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, दो महीने बीत जाने के बाद भी, सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) की अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी है, क्योंकि इन अपीलों में कुछ कमियां (डिफेक्ट्स) हैं।
इसके अलावा, मुख्य सचिव को इसी मामले में एक और कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। उन पर ‘आपराधिक अवमानना’ (criminal contempt) का मामला भी चल रहा है, जो एक दूसरी बेंच के सामने है। आरोप है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में राज्य की अपील की सुनवाई (listing) को लेकर एक गलत बयान दिया था। अदालत ने गौर किया कि 8 अप्रैल को एक एकल न्यायाधीश (सिंगल जज) का आदेश कर्मचारियों के पक्ष में आया था, और राज्य को 30 जून तक इसका पालन करने का समय दिया गया था। सरकार ने डिवीजन बेंच के समक्ष अपील दायर की और 3 अगस्त को अपीलीय अदालत ने भी कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आदेश का पालन करने के लिए 18 अगस्त तक का समय दिया। अदालत ने यह भी बताया कि उसने मुख्य सचिव से 31 अगस्त तक अनुपालन रिपोर्ट (compliance report) मांगी थी।
अदालत ने पाया कि स्पष्ट रूप से इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया है और मुख्य सचिव की ओर से कोई अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल नहीं की गई है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश किए गए एक दस्तावेज पर भी ध्यान दिया, जिसमें 17 अगस्त को वित्त विभाग ने सभी विभागीय प्रमुखों से कहा था कि विभाग की पूर्व सहमति के बिना अदालती आदेशों को लागू नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत को बताया कि सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने के कई मौके दिए गए थे।
दूसरी ओर, राज्य के वकील ने अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा जबकि ऐसी ही एक मांग 21 अगस्त को भी की गई थी।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, अदालत ने अब मुख्य सचिव से 30 अक्टूबर तक एक व्यक्तिगत हलफनामा (affidavit) मांगा है। यह हलफनामा 8 अप्रैल और 3 अगस्त को कर्मचारियों के पक्ष में दिए गए आदेशों के संबंध में होना चाहिए। साथ ही, अदालत ने 17 अगस्त के उस दस्तावेज (communication) के बारे में भी स्पष्टीकरण देने को कहा है। अदालत ने कहा कि यह हलफनामा तभी स्वीकार किया जाएगा जब 1 लाख रुपये का जुर्माना जमा किया जाएगा। इसके अलावा, अदालत ने मुख्य सचिव को 3 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।










