Adani ग्रुप की एयरपोर्ट पर निकोटीन पाउच की बिक्री को झटका लगा है। एक भारतीय कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि ड्यूटी-फ्री दुकानों पर बेचे जाने वाले सामान पर भी घरेलू कानून लगेंगे। मालूम हो इस निकोटीन पाउच की बिक्री को नई दिल्ली गैर-कानूनी कहता है और ड्रग्स मानता है।
ड्यूटी-फ्री बिक्री वाले मामले को लेकर Gautam Adani को अप्रैल में भारतीय अधिकारियों ने चुनौती दी और कहा था कि मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उसकी दुकानों में गैर-कानूनी तरीके से निकोटीन पाउच स्टॉक और बेचे जाते हैं, जो दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते निकोटीन प्रोडक्ट्स में से एक है, जिसे भारत में अभी भी मंजूरी नहीं मिली है।
अरबपति गौतम अडानी का ग्रुप भारत में आठ एयरपोर्ट मैनेज करता है। हवाई यात्रा की बढ़ती मांग का फायदा उठाने के लिए उसने ड्यूटी-फ्री दुकानों सहित $11 बिलियन का एक बड़ा विस्तार प्लान बनाया है जिसमें यह निकोटीन बेचना भी शामिल है।
भारतीय अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि निकोटीन पाउच स्टॉक करना ड्रग कानूनों का बड़ा उल्लंघन और गंभीर पब्लिक हेल्थ रिस्क है, हालाँकि अडानी ने कहा कि वो किसी भी तरह का गलत काम नहीं कर रहा।
अडानी ने कोर्ट में दलील दी कि इंटरनेशनल डिपार्चर एरिया में दुकानें घरेलू रेगुलेशन की पहुंच से बाहर हैं क्योंकि वे भारत के इलाके के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।
मुंबई हाई कोर्ट ने मंगलवार देर रात जारी एक ऑर्डर में इससे असहमति जताई।
ऑर्डर में कहा गया, “ऐसे सामान देश के कानून के तहत आएंगे और लागू रेगुलेटरी सिस्टम के तहत आएंगे, भले ही ट्रांज़ैक्शन कस्टम बैरियर के बाहर DFS (ड्यूटी फ्री शॉप्स) में हो।”
इसमें आगे कहा गया, “भारतीय इलाके के अधिकार क्षेत्र में DFS में लाए गए ऐसे सामान पर घरेलू रेगुलेटरी सिस्टम पूरी तरह से लागू होगा।”
कोर्ट में अपनी दलीलों में, अडानी ने यह भी दलील दी कि निकोटीन पाउच ड्रग नहीं हैं और हाल ही में आया इनोवेशन हैं, और भारतीय कानूनों के तहत इनकी कोई जांच नहीं होती।
कोर्ट ने कहा कि वह इस स्टेज पर उस सवाल का जवाब नहीं दे सकता और इसके बजाय कहा कि अडानी सपोर्टिंग मटीरियल के साथ इंडियन ड्रग रेगुलेटर्स के सामने अपनी बात रखने के लिए आज़ाद है और रेगुलेटर मेरिट के आधार पर उस पर फैसला कर सकता है।





