उम्र और पते के प्रमाण के रूप में affidavits, जीवन बीमा Policy स्वीकार नहीं
CHANDIGARH/NEW DELHI -Driving licence /ड्राइविंग लाइसेंस (DL) प्रणाली में केंद्र सरकार ने बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा है। इनमें भारतीय नागरिकों और विदेशी नागरिकों के लिए अलग-अलग रंग वाले (कलर-कोडेड) ड्राइविंग लाइसेंस, ब्लड ग्रुप और इमरजेंसी संपर्क जानकारी जैसी अनिवार्य डिटेल्स शामिल करना, और आवेदकों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की सख्त जांच करना शामिल है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने ‘केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989’ (Central Motor Vehicles Rules, 1989) में संशोधन का प्रस्ताव देते हुए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इन प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को मजबूत करना, फर्जी दस्तावेजों की संभावना को कम करना और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लाइसेंस से जुड़ी कई सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना है।
सबसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों में से एक यह है कि भारतीय और विदेशी नागरिकों को जारी किए जाने वाले ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अलग-अलग फॉर्मेट रखे जाएं। इस ड्राफ्ट में ऑनलाइन ‘सेफ-ड्राइविंग ट्यूटोरियल असेसमेंट’ (सुरक्षित ड्राइविंग ट्यूटोरियल मूल्यांकन) के लिए पासिंग मार्क्स को 60% से बढ़ाकर 75% करने का प्रस्ताव है। साथ ही, उम्र और पते के प्रमाण के रूप में अब शपथ-पत्र (affidavits) और जीवन बीमा पॉलिसियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अगर इन संशोधनों को मंजूरी मिल जाती है, तो ड्राइविंग लाइसेंस पर छपी जानकारी, आवेदकों को जमा करने वाले दस्तावेज और वाहन चालकों द्वारा अपनी व्यक्तिगत जानकारी अपडेट करने के तरीके में बदलाव आ सकता है।
भारतीयों और विदेशी नागरिकों के लिए अलग-अलग रंग वाले (कलर-कोडेड) ड्राइविंग लाइसेंस
प्रस्तावित संशोधनों के तहत, भारतीय नागरिकों और विदेशी नागरिकों को जारी किए जाने वाले ड्राइविंग लाइसेंस के फॉर्मेट और रंग अलग-अलग होंगे। ड्राइविंग लाइसेंस पर लाइसेंस धारक की राष्ट्रीयता (nationality) भी लिखी होगी, जिससे अधिकारियों के लिए इन दोनों श्रेणियों के लाइसेंस धारकों के बीच अंतर करना आसान हो जाएगा।

फिलहाल, भारत में जारी होने वाले ड्राइविंग लाइसेंस का फॉर्मेट एक जैसा ही होता है, चाहे लाइसेंस धारक भारतीय नागरिक हो या विदेशी। प्रस्तावित बदलाव से एक ऐसी प्रणाली लागू होगी जिसमें दोनों के बीच स्पष्ट अंतर होगा।
ड्राफ्ट में कहा गया है कि लाइसेंसिंग अथॉरिटी द्वारा जारी या रिन्यू किया जाने वाला हर ड्राइविंग लाइसेंस एक लैमिनेटेड कार्ड या पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) कार्ड के रूप में होगा, जो ‘फॉर्म 7’ (Form 7) में बताई गई शर्तों के अनुसार होगा।
प्रस्तावित नियमों के तहत, भारतीय और विदेशी नागरिकों के लिए अलग-अलग फॉर्मेट होंगे। यह कदम देश के ड्राइविंग लाइसेंस ढांचे में पहचान और सत्यापन (verification) प्रक्रिया को बेहतर बनाने के एक बड़े प्रयास का हिस्सा है।
ड्राइविंग लाइसेंस पर ब्लड ग्रुप, मोबाइल नंबर और इमरजेंसी संपर्क की जानकारी हो सकती है
एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव ड्राइविंग लाइसेंस पर दिखाई जाने वाली व्यक्तिगत जानकारी से जुड़ा है। मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस में धारक की निम्नलिखित जानकारी शामिल करना अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है:
ब्लड ग्रुप और इमरजेंसी संपर्क जानकारी को शामिल करने से सड़क दुर्घटनाओं और मेडिकल इमरजेंसी के समय काफी मदद मिल सकती है, खासकर तब जब किसी व्यक्ति की पहचान करना या उसके परिवार के सदस्यों से संपर्क करना मुश्किल हो।
इस अतिरिक्त जानकारी से लाइसेंसिंग अधिकारियों को लाइसेंस धारक के बारे में और अधिक विवरण मिल सकेंगे। हालाँकि, ये प्रस्तावित बदलाव अभी केवल एक ड्राफ्ट (प्रारूप) के चरण में हैं, और अंतिम आवश्यकताएं परामर्श प्रक्रिया के बाद सरकार द्वारा लिए जाने वाले निर्णय पर निर्भर करेंगी।
ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट: पासिंग मार्क्स 60% से बढ़कर 75% हो सकते हैं
केंद्र सरकार ने ऑनलाइन ‘सेफ-ड्राइविंग ट्यूटोरियल’ असेसमेंट (मूल्यांकन) को और अधिक सख्त बनाने का प्रस्ताव रखा है। मौजूदा व्यवस्था के तहत, इस असेसमेंट को पास करने के लिए 60% अंक चाहिए होते हैं। ड्राफ्ट में इस सीमा को बढ़ाकर 75% करने का प्रस्ताव है।
मंत्रालय ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि ‘सेफ-ड्राइविंग ट्यूटोरियल’ की अवधि कम से कम 30 मिनट होनी चाहिए।
इन प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य असेसमेंट प्रक्रिया को मजबूत करना है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले लोग, आगे बढ़ने से पहले सुरक्षित ड्राइविंग के तरीकों को अच्छी तरह समझ लें। पासिंग मार्क्स बढ़ने का मतलब यह होगा कि आवेदकों को सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक नियमों और जिम्मेदारी से गाड़ी चलाने के तरीकों की बेहतर समझ दिखानी होगी।
ये प्रस्तावित बदलाव ट्यूटोरियल की आवश्यकताओं में भी बदलाव लाएंगे, जिससे असेसमेंट प्रक्रिया और अधिक व्यवस्थित हो जाएगी।
लाइसेंस के लिए आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र (EPIC), ई-राशन कार्ड, या पिछले तीन महीनों के भीतर जारी किए गए बिजली और गैस के बिल। उम्र के प्रमाण के लिए, आवेदक पासपोर्ट, स्कूल बोर्ड की मार्कशीट, जन्म प्रमाण पत्र या सरकारी विभागों द्वारा जारी पहचान पत्रों का उपयोग कर सकते हैं। पहचान के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड, पासपोर्ट, ई-राशन कार्ड और पैन कार्ड स्वीकार किए जा सकते हैं। वहीं, प्रस्तावित नियमों के अनुसार, विदेशी नागरिकों को भारत में अपनी कानूनी मौजूदगी साबित करने वाले दस्तावेज जमा करने पड़ सकते हैं।
दस्तावेजों से जुड़ी इन प्रस्तावित आवश्यकताओं का उद्देश्य सत्यापन प्रक्रिया को एक समान बनाना और शपथ पत्रों या ऐसे दस्तावेजों पर निर्भरता कम करना है, जिनकी सत्यता की जांच करना मुश्किल हो सकता है। आवेदकों के लिए इसका मतलब यह है कि नया ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने या मौजूदा लाइसेंस में कोई बदलाव कराने से पहले, उन्हें यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनकी पहचान, पते और जन्म तिथि से जुड़े दस्तावेज सही और व्यवस्थित हैं।
आधार प्रमाणीकरण के जरिए लाइसेंस में अपडेट मुफ्त
प्रस्तावित संशोधनों में ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी कुछ सेवाओं के लिए लगने वाली फीस में बदलाव का भी सुझाव दिया गया है। इस प्रस्ताव के तहत, यदि आवेदक ऑनलाइन आधार प्रमाणीकरण का उपयोग करते हैं, तो कुछ चुनिंदा सेवाएं बिना किसी शुल्क के मिल सकती हैं। इन सेवाओं में ड्राइविंग लाइसेंस धारक के निम्नलिखित विवरणों में बदलाव शामिल हैं:
नाम
घर का पता
मोबाइल नंबर
संपर्क विवरण
फीस में इस प्रस्तावित छूट का उद्देश्य आवेदकों को डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना और ड्राइविंग लाइसेंस में नियमित अपडेट की प्रक्रिया को आसान बनाना है।





