चंडीगढ़। big breaking : पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ और एक अन्य केंद्र शासित दादरा और नगर हवेली में राशन कार्ड धारकों के लिए फ़ूड सब्सिडी (खाने-पीने की चीज़ों पर मिलने वाली छूट) पाने के तरीके में एक बड़ा बदलाव होने वाला है। 14 अगस्त, 2026 से, योग्य लाभार्थियों को ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ (PMGKAY) के तहत ई-रुपया सिस्टम के ज़रिए उनके डिजिटल वॉलेट में सब्सिडी मिलेगी।
जिन -जिन राज्यों में राशन कार्ड उपोदते हो जायेंगे वहां यह सुविधा शुरू हो जाएगी।
यह डिजिटल पैसा एक खास मकसद के लिए होगा। लाभार्थी इसका इस्तेमाल सिर्फ़ सरकार द्वारा अधिकृत ‘फेयर प्राइस शॉप’ (उचित मूल्य की दुकानों) से गेहूं या चावल खरीदने के लिए कर सकते हैं।
ई-रुपये का इस्तेमाल मोबाइल रिचार्ज, कपड़े, शराब या दूसरे निजी खर्चों के लिए नहीं किया जा सकता है। राशन खरीदने के लिए, लाभार्थियों को तय राशन की दुकान पर एक QR कोड स्कैन करना होगा।
इस बैलेंस की वैलिडिटी (मान्यता) 30 दिन की होगी। अगर लाभार्थी इस समय के अंदर सब्सिडी का इस्तेमाल नहीं करता है, तो वह रकम सरकारी खाते में वापस चली जाएगी।
ई-रुपया KYC कैसे पूरा करें
जो लाभार्थी इस सुविधा का इस्तेमाल करना चाहते हैं, उन्हें PNB डिजिटल रुपया ऐप डाउनलोड करना होगा और KYC पूरी करनी होगी। वे अपने नज़दीकी राशन ऑफिस या तय कैंप में जाकर इस प्रोसेस के लिए अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दे सकते हैं।
मदद के लिए, लाभार्थी टोल-फ्री नंबर 1800-180-2068 पर संपर्क कर सकते हैं।
बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले मॉडल का टेस्ट किया गया
डिजिटल सब्सिडी मॉडल का टेस्ट सबसे पहले पुडुचेरी और गुजरात में किया गया था। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, अब इस सिस्टम को चंडीगढ़ और दादरा और नगर हवेली में शुरू किया जा रहा है।
इस कदम का मकसद लीकेज (गड़बड़ी) को कम करना और यह पक्का करना है कि अनाज के लिए दी जाने वाली सब्सिडी का इस्तेमाल असल में राशन खरीदने के लिए ही हो।
किसी भी दुकान से राशन लिया जा सकता है
डिजिटल सब्सिडी सिस्टम के साथ-साथ, सरकार ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ (ONORC) सिस्टम को भी मज़बूत कर रही है।
ONORC के तहत, योग्य राशन कार्ड धारक देश भर में किसी भी शामिल ‘फेयर प्राइस शॉप’ से सब्सिडी वाला अनाज ले सकते हैं, उन्हें किसी एक दुकान तक सीमित नहीं रहना पड़ता। यह सिस्टम उन लोगों के लिए खास तौर पर फ़ायदेमंद है जो काम या दूसरी वजहों से एक राज्य से दूसरे राज्य जाते रहते हैं।
सरकार को उम्मीद है कि इस सिस्टम से राशन मिलना ज़्यादा आसान होगा, लाइनें कम होंगी और अनाज बांटने में पारदर्शिता आएगी।








