जालंधर: Dinesh Dhall की बीजेपी में एंट्री के बाद जालंधर नॉर्थ की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है। आज जब उन्होंने सैंकड़ों युवाओं के साथ पंजाब सरकार की नीतियों के विरोध में रैली निकाली तो युवाओं का हुजूम देखते बन रहा था। सिर्फ फ़ोन कॉल पर इतने युवाओं का आना बड़ी बात है।
कभी जालंधर नॉर्थ के AAP हलका इंचार्ज रहे Dinesh Dhall से यह जिम्मेदारी लेकर मेयर विनीत धीर को सौंप दी गई थी। इसके बाद ढल्ल ने बीजेपी का दामन थाम लिया और उनकी राजनीतिक सक्रियता ने नए समीकरणों की चर्चा को जन्म दे दिया है। दिनेश ढल्ल ने पहले ही संकेत दे दिया था कि वह वही रास्ता चुनेंगे, जो उनके समर्थक और लोग चाहेंगे। अब बीजेपी में उनकी मौजूदगी को इसी राजनीतिक ताकत के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।
उनके पास अपना एक मजबूत समर्थक वर्ग
सबसे बड़ा फैक्टर है युवा वोट। दिनेश ढल्ल के साथ बड़ी संख्या में युवा जुड़े हुए हैं। धरने-प्रदर्शन के दौरान भी सैकड़ों युवाओं की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि उनके पास अपना एक मजबूत समर्थक वर्ग है। राजनीतिक जानकारों की नजर में अगर यह समर्थन वोट में तब्दील होता है तो जालंधर नॉर्थ में ढल्ल किसी भी राजनीतिक समीकरण को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
लेकिन कहानी का दूसरा पहलू भी कम दिलचस्प नहीं है। बीजेपी में उनकी एंट्री से जहां एक तरफ नए समीकरण बन रहे हैं, वहीं पार्टी के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच इस बदलाव को लेकर सहजता कितनी है, यह आने वाला समय बताएगा। सवाल यह भी है कि पार्टी के पुराने चेहरे और नए प्रभावशाली नेताओं के बीच तालमेल किस तरह बैठता है। ढल्ल की ताकत सिर्फ भीड़ नहीं, बल्कि उस भीड़ को वोट में बदलने की क्षमता होगी। यही वह राजनीतिक परीक्षा है, जिस पर आने वाले समय में सबकी नजर रहेगी।

महज 3-4 महिलाओं की मौजूदगी ने सवाल खड़े किये
आज के प्रदर्शन में एक और बात खास तौर पर नजर आई, महिलाओं की बेहद कम भागीदारी। सैकड़ों युवाओं के बीच महिलाओं और लड़कियों की संख्या बेहद सीमित दिखाई दी। महज तीन-चार महिलाओं की मौजूदगी ने यह सवाल जरूर खड़ा किया कि क्या ढल्ल का राजनीतिक प्रभाव अभी मुख्य रूप से युवा पुरुष वर्ग तक ही सीमित है? अगर दिनेश ढल्ल और उनके करीबी सहयोगी अपने राजनीतिक आधार को और व्यापक बनाना चाहते हैं तो महिला वर्ग तक पहुंच बनाना भी उतना ही जरूरी होगा। क्योंकि आधी आबादी को नजरअंदाज करके किसी भी मजबूत जनाधार को पूर्ण राजनीतिक ताकत में बदलना आसान नहीं होता।
अब असली सवाल यही है—क्या दिनेश ढल्ल बीजेपी के लिए हजारों नए वोट जोड़ पाएंगे, या उनकी एंट्री पार्टी के अंदर ही नए सियासी समीकरण और नई चुनौतियां पैदा करेगी? इसका जवाब आने वाले चुनावी माहौल में धीरे-धीरे साफ होगा।








