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ED JALANDHAR की पठानकोट में 17 जगहों पर रेड, रिटायरमेंट से पहले ADC कर गया बड़ा खेल

July 20, 2026 3:32 PM
JALANDHAR ED RAID
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जालंधर /पठानकोट : ED JALANDHAR ने पठानकोट में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास अवैध रेत खनन की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में 17 जगहों पर तलाशी ली है। कहा जा रहा है, इनमें पठानकोट जिले में आम आदमी पार्टी (AAP) के एक पदाधिकारी का ठिकाना भी शामिल है।

ये तलाशी 23 दिन से जारी है। पठानकोट सीमावर्ती जिले और उसके आसपास की खनन कंपनियों और स्टोन क्रशर के साथ-साथ पठानकोट, अमृतसर और गुरदासपुर में AAP के पदाधिकारी विजय कटारूचक से जुड़े घरों में ली गई।

विपक्ष और ED के सूत्रों के मुताबिक, विजय कटारूचक, AAP मंत्री लाल चंद कटारूचक के करीबी सहयोगी हैं। वे खनन कंपनियों और उनके मालिकों को संरक्षण देने में शामिल पाए गए हैं।

ED की यह जांच राज्य के विजिलेंस ब्यूरो द्वारा 2023 में पठानकोट में रिटायर असिस्टेंट डेवलपमेंट कमिश्नर (ग्राम विकास) कुलदीप सिंह के खिलाफ दर्ज मामले से जुड़ी है। राज्य की भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसी ने उन पर अंतरराष्ट्रीय सीमा से कुछ किलोमीटर दूर स्थित लगभग 92 एकड़ पंचायत भूमि को सात महिलाओं को देने का आदेश जारी करने का आरोप लगाया था, जो उन्होंने अपने रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले दिया था।

एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि अगस्त 2022 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा इस क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के बावजूद इलाके में खनन गतिविधियां बेरोकटोक जारी रहीं।

राज्य में केंद्रीय एजेंसी की छापेमारी के इस नए दौर ने – जिसमें राज्य विधानसभा में भोआ निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले AAP विधायक लाल चंद कटारूचक के कटारूचक गांव में तलाशी भी शामिल है। कटारूचक के पास भगवंत मान के नेतृत्व वाली कैबिनेट में खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले तथा वन और वन्यजीव संरक्षण विभाग भी हैं।

2023 में हुई जांच के दौरान यह पता चला कि मंत्री कटारूचक ने एक अर्ध-सरकारी पत्र के माध्यम से अपने कैबिनेट सहयोगी कुलदीप सिंह धालीवाल से कुलदीप सिंह को ADC के पद पर नियुक्त करने की सिफारिश की थी। उस समय की रिपोर्टों के अनुसार, सिंह को उस साल 24 फरवरी को – यानी उनके रिटायरमेंट से चार दिन पहले – अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था।

‘रिटायरमेंट से एक दिन पहले धोखाधड़ी से ज़मीन का ट्रांसफर’

केस के रिकॉर्ड के अनुसार, विलेज डेवलपमेंट और पंचायत के फाइनेंस कमिश्नर ने दो जांच अधिकारियों की एक कमेटी बनाई। कमेटी ने पाया कि सिंह ने सात महिलाओं के पक्ष में आदेश पास किया था, जबकि वह ज़मीन ‘पंजाब विलेज कॉमन लैंड रेगुलेशन एक्ट 1961’ के दायरे में आती थी—यानी वह ऐसी कॉमन ज़मीन थी जिसका इस्तेमाल निजी कामों के लिए नहीं किया जा सकता था।

जांच में कमेटी ने पाया कि वीणा परमार, बलविंदर कौर, मंजीत कौर, भारती बंटा, इंद्रदीप कौर, सोम राज, परवीन कुमारी और तरसेम रानी नाम की महिलाओं ने दिसंबर 2022 में ज़िला रेवेन्यू डिपार्टमेंट में कॉमन ज़मीन पर मालिकाना हक पाने के लिए अपनी फ़ाइल आगे बढ़ाई थी।

हालांकि, उनकी अर्ज़ी को मंज़ूरी तब मिली जब सिंह ने ज़िले में डेवलपमेंट कमिश्नर का पद संभाला और 27 फरवरी को आदेश पास किया।

जांच रिपोर्ट के आधार पर, सरकार के डेवलपमेंट स्पेशल सेक्रेटरी और पंचायत अधिकारी ने विजिलेंस ब्यूरो से संपर्क किया और सिंह तथा धोखाधड़ी से ज़मीन पाने वाली महिलाओं के खिलाफ़ केस दर्ज करने की मांग की।

गोल गांव (जहां 92 एकड़ ज़मीन अलॉट की गई थी) पाकिस्तान की सीमा के पास रावी नदी के निचले बेसिन में स्थित है। हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बावजूद, यह गांव पिछले कुछ सालों से अवैध माइनिंग का गढ़ रहा है।

अख़बार ने टिप्पणी के लिए AAP के प्रवक्ता बलतेज पन्नू से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि वे यह पता लगाने के बाद जवाब देंगे कि क्या विजय कटारुचक सच में AAP मंत्री लाल चंद कटारुचक के करीबी हैं, जैसा कि विपक्ष ने आरोप लगाया है। -इनपुट द प्रिंट

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