Gandhi’s Killer Godse was RSS’s active member : महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सक्रिय सदस्य थे। हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर के पोते (भाई के पोते) ने अदालत में यह बात कही, जिस पर कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा: “सच के सामने आने का भी अजीब तरीका होता है।”
सत्याकी सावरकर ने यह बयान तब दिया जब उनसे मानहानि के एक मामले में जिरह (cross-examination) की जा रही थी। यह मामला उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ वी.डी. सावरकर के बारे में दिए गए एक भाषण को लेकर दायर किया था।
कांग्रेस नेता के वकील मिलिंद पवार ने पूछा कि क्या गोडसे बंधु RSS के सक्रिय सदस्य थे। सत्याकी ने जवाब दिया, “यह सच है कि मेरे दादा गोपाल गोडसे और नाथूराम गोडसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय सदस्य थे।”
सत्याकी ने कहा कि नाथूराम हिंदू महासभा के सदस्य भी थे।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तुरंत इस बात पर प्रतिक्रिया दी।
खेड़ा ने X (पहले ट्विटर) पर लिखा, “सच के सामने आने का भी अजीब तरीका होता है। RSS ने 78 साल से ज़्यादा समय तक गोडसे से पल्ला झाड़े रखा, लेकिन उनके गुरु सावरकर के पोते ने ही पुणे की अदालत में यह कहकर संघ के मुंह पर ज़ोरदार तमाचा जड़ दिया कि गांधी जी के हत्यारे गोडसे असल में RSS के सदस्य थे।”
खेड़ा ने आगे कहा, “यह तो बस शुरुआत है। वह दिन दूर नहीं जब यह सच हर संघी को परेशान करेगा।”
मुकदमे के दौरान, नाथूराम गोडसे ने बार-बार कहा था कि उन्होंने संघ छोड़ दिया था और “हिंदुओं के उचित अधिकारों” की रक्षा के लिए हिंदू महासभा में शामिल हो गए थे।
हालांकि, इतिहासकार धीरेंद्र के. झा अपनी किताब ‘गांधीज़ असैसिन’ (Gandhi’s Assassin) में कहते हैं कि यह दावा “गोडसे के जीवन के सबसे चर्चित पहलुओं में से एक रहा है” क्योंकि बाद में, “RSS समर्थक लेखकों ने इसमें RSS को गांधी की हत्या के आरोपों से बरी करने का मौका देखा।”
झा लिखते हैं कि “गोडसे के औपचारिक रूप से महासभा में शामिल होने की सही तारीख आज तक पता नहीं चल पाई है… किसी भी स्रोत से कोई सबूत – न कोई दस्तावेज़, न कोई गवाही – इसका ज़िक्र नहीं करता है।” महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि RSS का हमेशा से यही कहना रहा है कि गोडसे भाइयों का संगठन से कोई लेना-देना नहीं था।
सावंत ने कहा, “अब इस खुलासे के बाद RSS को जवाब देना होगा। क्या RSS ने लोगों से झूठ बोला? उन्हें इसका जवाब देना ही होगा।”
सत्याकी सावरकर ने 2023 में मजिस्ट्रेट के सामने शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि राहुल ने लंदन में एक भाषण में दावा किया था कि वी.डी. सावरकर ने अपनी एक किताब में लिखा है कि उन्होंने और उनके दोस्तों ने एक बार एक मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई की थी और उन्हें खुशी हुई थी। शिकायत में कहा गया है कि सावरकर ने ऐसा कुछ कभी नहीं लिखा था।
इस मामले की पिछली सुनवाई में सत्याकी ने अदालत से यह भी कहा था: “यह सच है कि सावरकर ने दस बार दया याचिका दायर की थी… यह सच है कि उसी दौर के क्रांतिकारियों – राजगुरु, बटुकेश्वर दत्त और अशफाकउल्ला खान – ने दया याचिका दायर नहीं की थी। यह सच है कि सावरकर ने सज़ा सुनाए जाने के एक महीने के भीतर ही दया याचिका दायर कर दी थी।”








