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UK में भारतीय महिला को तलाक में मिले 85 करोड़

June 4, 2026 5:18 PM
UK में भारतीय महिला को तलाक में मिले 85 करोड़
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24 साल तक लड़ी क़ानूनी लड़ाई

लंदन। 24 साल से चल रहे तलाक़ के एक मामले में भारतीय मूल की महिला वर्षा को UK में 6.6 मिलियन पाउंड (लगभग 85 करोड़ रुपये) का मुआवज़ा मिला है।

मामले की शुरुआत 2002 में हुई थी, जब वर्षा गोहिल ने अपने पति भद्रेश गोहिल से तलाक़ के लिए अर्ज़ी दी थी। उन्होंने तलाक़ का आधार पति के बाहर संबंध और अनुचित व्यवहार को बताया था। उस समय, इस दंपति के तीन बच्चे थे और वे एक ऐसे वित्तीय समझौते पर पहुँचे थे, जो देखने में काफ़ी सीधा-सादा लग रहा था। वर्षा ने लगभग 270,000 पाउंड (लगभग 3.5 करोड़ रुपये) स्वीकार किए और परिवार की Peugeot कार अपने पास रख ली।

लेकिन उन्हें कभी भी पूरी तरह से यह विश्वास नहीं हुआ कि उनके पति की सारी संपत्ति का खुलासा कर दिया गया है। इन शंकाओं को साबित करने के लिए वर्षा के पास बहुत कम सबूत थे। लेकिन स्थिति तब बदली, जब भद्रेश गोहिल एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग (अवैध धन को वैध बनाने) मामले की जाँच के घेरे में आ गए। इस जाँच का संबंध नाइजीरिया के पूर्व गवर्नर जेम्स इबोरी के सहयोगियों से था।

अधिकारियों ने उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने ‘ऑफशोर’ (विदेशी) ढाँचों और ग्राहकों के खातों के ज़रिए लाखों पाउंड की रक़म को इधर-उधर करने में मदद की थी। एक लंबी जाँच के बाद, उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग, जालसाज़ी और धोखाधड़ी की साज़िश रचने का दोषी ठहराया गया। वर्ष 2011 में, उन्हें 10 साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई।

इस दौरान करोड़ों पाउंड की ऐसी संपत्ति का पता चला, जिसका ज़िक्र तलाक़ के मूल मामले के दौरान कभी सामने नहीं आया था। बाद में, सरकारी वकीलों ने लगभग 28 मिलियन पाउंड की संपत्ति को ज़ब्त (फ्रीज़) करने की माँग की। उनका आरोप था कि इस संपत्ति को अलग-अलग देशों में काम करने वाली कंपनियों के एक नेटवर्क के ज़रिए छिपाकर रखा गया था।

इन नए खुलासों से वर्षा के उस लंबे संघर्ष को एक नई रफ़्तार मिली, जिसके तहत वह तलाक़ के मूल समझौते को चुनौती देने की कोशिश कर रही थीं।

यह विवाद आखिरकार UK के सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया। 2015 में दिए गए एक फ़ैसले में, न्यायाधीशों ने वर्षा को वित्तीय समझौते के मामले को फिर से खोलने की अनुमति दे दी। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि कोई भी जीवनसाथी, जो अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा देने में नाकाम रहता है, उसे अपनी इस नाकामी का कोई फ़ायदा नहीं मिलना चाहिए।

matrimonial property

‘क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस’ (सरकारी अभियोजन पक्ष) ने यह तर्क दिया कि ज़ब्त की गई संपत्ति पूरी तरह से अपराध से अर्जित धन है और इसका इस्तेमाल संपत्ति ज़ब्ती की कानूनी प्रक्रिया के लिए ही किया जाना चाहिए। वहीं, वर्षा ने यह दावा किया कि इस संपत्ति का कम से कम कुछ हिस्सा तो ऐसा है, जिसे शादी के दौरान वैध व्यवसायों के ज़रिए ही अर्जित किया गया था। इसलिए, इसे ‘वैवाहिक संपत्ति’ (matrimonial property) के तौर पर ही माना जाना चाहिए। इस बीच, भद्रेश गोहिल ने दलील दी कि ये संपत्तियाँ उनकी थीं ही नहीं।

यह मामला आख़िरकार हाई कोर्ट पहुँचा, जहाँ जस्टिस विलियम्स ने ज़ब्त की गई संपत्ति पर किए जा रहे अलग-अलग दावों की जाँच की।

जज ने यह निष्कर्ष निकाला कि संपत्ति का कुछ हिस्सा वैध स्रोतों से आया था और वह पति-पत्नी की साझा संपत्ति का हिस्सा था। उन्होंने लगभग 6.66 मिलियन पाउंड की बेदाग़ संपत्ति की पहचान की और वह राशि वर्षा को देने का फ़ैसला सुनाया। डेली मेल के अनुसार, जस्टिस विलियम्स ने कहा, “बेईमानी और उसके परिणामों के मामले में पति का आचरण सबसे निचले स्तर का है।”

जज ने भद्रेश गोहिल के बचाव पक्ष की भी आलोचना की और उन्हें “पूरी तरह से और हर जगह बेईमान” बताया।

इस असाधारण कानूनी गाथा पर टिप्पणी करते हुए, जस्टिस विलियम्स ने कहा कि “गोहिल” नाम “अलग-अलग अधिकार क्षेत्रों के वकीलों और जजों की यादों में लंबे समय तक बना रहेगा,” क्योंकि इस मुकदमे ने “बहुत ही पेचीदा रास्ता” अख़्तियार किया था।

पिछले महीने, UK की अपील अदालत ने फ़ैसला सुनाया कि अब इस मामले में आगे कोई अपील नहीं होगी, जिसके साथ ही यह मामला समाप्त हो गया।

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